सरदार पटेल : व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम, डा० शाहिद परवेज़ की कलम से

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भारत का राष्ट्रीय आंदोलन अपने व्यापक क्षितिज के साथ साम्राज्यवादी निरंकुशता के विरुद्ध एक वैज्ञानिक संघर्ष था जिसने उपनिवेशवाद विरोधी विचारधारा को सक्रियता के साथ व्यापक स्तर पर फैलाया।

यह आन्दोलन अपनी नैतिक तथा वैचारिक पृष्ठभूमि के साथ स्वतंत्रता प्राप्ति तक गतिशील रहा तथा इसने भारत की सम्पूर्ण जनता, विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक विचारधाराओं और प्रवृत्तियों तथा उनके स्वर का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय आंदोलन ने राजनीतिक व्यवहार तथा संस्कृति के जिस प्रतिमान को स्थापित किया उसमें विभिन्न विचारों के बीच सामंजस्य स्थापित करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। औपनिवेशिक साम्राज्य की समाप्ति और अंततः स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद मुख्य कार्य भारत के अस्तित्व को एक राष्ट्र के रूप में विकसित करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ राष्ट्रीय आंदोलन के मूल्यों, आदर्शों और उसकी विरासत को स्थापित करना था।

यह सर्वविदित है कि स्वतंत्र भारत ने जब अपने नवनिर्माण का कार्य प्रारंभ किया तो उसके पास उच्चतम नैतिक आचरण तथा उच्चतम मूल्य एवं आदर्शों के प्रति समर्पित नेताओं की एक लम्बी श्रृंखला थी और निर्विवाद रूप से सरदार पटेल महानतम नेताओं में श्रेष्ठ थे जो न सिर्फ़ दृढ़ इच्छाशक्ति के स्वामी थे बल्कि प्रशासनिक गुणों में निपुणता, व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन की इमानदारी और सादगी उनको उनके समकालीन नेताओं से अलग भी करती है। आधुनिक इतिहास लेखन की यह विडम्बना ही है कि उसने सरदार पटेल के संदर्भ में न सिर्फ़ वस्तुनिष्ठ समालोचना/ अध्ययन को प्रस्तुत नहीं किया बल्कि उनके व्यक्तित्व को दो भागों में विभाजित कर दिया। एक ओर उनके प्रशंसक थे जिन्होंने नीतिगत स्तर उनके वैचारिक मतभेद को प्रमुखता से प्रस्तुत किया वहीं दूसरी ओर उन आलोचकों की भी कमी नहीं रही जो पटेल को विपरीत ध्रुव पर स्थापित करते आए हैं। साम्राज्यवादी धारणा इस प्रचार के साथ कार्यरत रही थी कि औपनिवेशिक साम्राज्य में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा उनका कर्तव्य है। सरदार पटेल ने साम्राज्यवादी दावों को ग़लत सिद्ध करते कहा कि उनसे ( साम्राज्यवादियों ) अधिक अल्पसंख्यकों की रक्षा में हमारी दिलचस्पी है। रफ़ीक़ ज़करिया ने अपनी पुस्तक, ‘ सरदार पटेल और भारतीय मुसलमान ‘ में अल्पसंख्यकों के प्रति सरदार पटेल की नीतियों का साहसिक विश्लेषण करते हुए संदर्भित किया है कि वैचारिक स्तर पर पटेल जनवादी, नागरिक स्वतंत्रताओं के प्रति गंभीर और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने वाले थे। आज़ादी के बाद जब साम्प्रदायिकता का प्रलय अपने चरम पर था तब सरदार पटेल ने धर्मनिरपेक्षता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए समान नागरिक अधिकार को राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत से ताबीर किया।

सरदार पटेल का स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय अस्मिता के विकास में अतुलनीय एवं अद्वितीय योगदान है। सरदार पटेल ने रजवाड़ों के प्रतिनिधियों को संविधान सभा में लाने, अलग मतदान क्षेत्र समाप्त करने तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों को सीटों का आरक्षण देने की कोशिशें विफल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरदार पटेल ने साहसिक और गंभीर प्रयास करते हुए देशी रजवाड़ों को राजनीतिक मुख्यधारा में लाने का अतुलनीय कार्य किया जिसने राष्ट्र निर्माण के साथ राष्ट्रवाद के विचार की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सरदार पटेल ने अपनी दक्षता, कार्यकुशलता एवं राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देते हुए सैकड़ों रजवाड़ों एवं रियासतों को भारतीय संघ में एक वर्ष के अन्दर सम्मिलित करने का अभूतपूर्व कार्य किया।

सरदार पटेल ने भारत में प्रशासनिक तंत्र और उसके ढ़ांचे को पुनर्जीवित करने का एक साहसिक और महत्वपूर्ण कार्य किया था। औपनिवेशिक काल में जो प्रशासनिक व्यवस्था प्रचलित थी वह मुख्यतः भू-राजस्व एकत्र करने तथा क़ानून व्यवस्था की स्थापना तक सीमित थी मगर सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद एक राष्ट्र के रूप में भारत के विकास के लिए प्रशासनिक तंत्र के महत्व को न सिर्फ़ संविधान सभा में रेखांकित किया बल्कि इसकी उपयोगिता और आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

उनके अनुसार तत्कालीन परिस्थितियों में कुशल प्रशासनिक तंत्र एक आवश्यक तत्व है और इसे एक ऐसे तंत्र में विकसित करने की ज़रूरत है जो विकासशील समाज की आर्थिक और सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में सक्षम हो।
सरदार पटेल के स्वाधीनता आंदोलन में अतुलनीय योगदान के साथ स्वतंत्र भारत को विकसित करने तथा सशक्त राष्ट्रीय अस्मिता को जन्म देने के लिए उनके परिश्रम, लगन तथा प्रतिबद्धता को और अधिक स्पष्टता से स्वीकार करने की ज़रूरत है। उन्होंने अपनी ईमानदारी, सादगी, श्रेष्ठ राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवहार से एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया है जो राष्ट्रीय आंदोलन के सभी मूल्यों का साझीदार होने के साथ भविष्य के भारत का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी था।।

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