पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर के संकट से बाजार में मोबाइल फोन की 95 फीसदी की गिरावट

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नई दिल्ली, इस दिवाली में महंगाई के साथ ही एक छोटी सी चिप देश के लिए बड़ी फिक्र बनकर आई है. ये है सेमीकंडक्टर (Semiconductor) , जिसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का दिमाग कहा जाता है और इस वक्त पूरी दुनिया में इसका संकट छाया हुआ है।

लेकिन देश में हालत ये है कि अगर आपके पास पैसे हों और दिवाली पर अपनी मनपसंद गैजेट घर लेकर आना चाहते हैं, तब भी बाजार से आप खाली हाथ ही लौटेंगे. ये संकट कितना बड़ा है, इसकी हमने इलेक्ट्रॉनिक बाजार में पड़ताल की है।

दिवाली का त्योहार है, बाजार गुलजार हैं. त्योहारी खरीदारी के लिए भीड़ ऐसे उमड़ रही है, मानो देश ने कोरोना पर विजय पा ली हो. संक्रमण का खतरा पूरी तरह से टल चुका हो, लेकिन एक जगह पर ये त्योहारी रौनक इस बार भी फीकी पड़ गई है और वो हैं देश के इलेक्ट्रॉनिक बाजार. मोबाइल फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर हों, टीवी, फ्रिज या फिर वॉशिंग मशीन हों या फिर कार या SUV. इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बाजार में भारी कमी हो गई है और इसकी वजह है सेमीकंडक्टर चिप, जिसे आम बोलचाल की भाषा में उपकरणों का दिमाग कहा जाता है।

सेमीकंडक्टर के संकट से बाजार में मोबाइल फोन की कितनी कमी है, ये समझने के लिए हम नोएडा के सबसे बड़े मोबाइल बाजार में पहुंचे. मोबाइल बाजार में हमें पता चला कि आम दिनों में जब दुकानों पर 100 मोबाइल की सप्लाई होती थी, वो कोरोना के बाद घटकर पांच रह गई है, यानी 95 परसेंट की गिरावट. हालत ये है कि मोबाइल फोन तो लगातार लॉन्च हो रहे हैं, लेकिन खरीदार भी बाजार से मायूस होकर लौट रहे हैं. ये संकट सिर्फ एक दुकान में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है. एक तरफ तो कोरोना की महामारी ने घर-घर में गजट की जरूरत बढ़ा दी तो दूसरी ओर उसी कोरोना ने सिलिका का संकट पैदा कर दिया, जिसका असर बाजारों में दिख रहा है।

टीवी9 भारतवर्ष ने इस संकट की पड़ताल को आगे बढ़ाया और टेलीविजन की दुकानों पर भी वही संकट नजर आया. दरअसल ये चिप तैयार करने में चीन बहुत आगे है और एक तरह से दुनिया की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, लेकिन जबसे चिप बनाने वाले देशों में सेमीकंडक्टर का प्रोडक्शन घटा है, दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां खुद को लाचार महसूस कर रही हैं. भारत ने भी कोरोनाकाल में सेमीकंडक्टर की अहमियत समझी है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार ने देश में चिप के निर्माण की योजना बनाई है. भारत सरकार ताइवान, साउथ कोरिया समेत कई देशों को भारत में चिप प्रोडक्शन के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इस योजना की निगरानी खुद PMO से की जा रही है और कई मंत्रालयों को इसमें जोड़ा गया है।

लेकिन इन योजनाओं को धरती पर उतारने में अभी वक्त लगेगा और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की परेशानी बता रही है कि हालात संभलने में 6 से 8 महीने तक का वक्त लग सकता है. हमने एक मोबाइल मैन्युफेक्चरिंग यूनिट में इन्हीं दिक्कतों को समझने की कोशिश की है. ये सेमीकंडक्टर ही है, जिसने आपकी और इलेक्ट्रॉनिक बाजार की दिवाली फीकी कर रखी है. इस दिशा में आत्मनिर्भर बनने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है और 750 करोड़ रुपए तक का बजट बनाया है. अगले पांच साल में भारत में 15 सेमीकंडक्टर डिजाइन विकसित करने का प्लान है, लेकिन इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा।

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