एयर इंडिया एक बार फिर हो सकती है टाटा की, स्पाइस जेट ने भी लगाई बोली, सरकार बेच रही है 100 प्रतिशत हिस्सेदारी

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नई दिल्ली, एयर इंडिया को खरीदने में सिर्फ दो निवेशकों ने रुचि दिखाई है। बुधवार को बोली लगाने के आखिरी दिन टाटा ने अपनी बोली लगाई। वहीं स्पाइस जेट के चेयरमैन अजय सिंह ने अपनी निजी हैसियत से बोली लगाई है।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार सरकारी स्वामित्व वाली इस एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इसमें एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल हैं। एयर इंडिया पर कुल 43 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है, और यह पूरा कर्ज सरकारी गारंटी पर है। अगर टाटा बोली जीत जाती है तो उसे एयर इंडिया में मालिकाना हक मिल जाएगा। एयरलाइंस का स्वामित्व नई कंपनी को देने के पहले इस कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी सरकार पर होगी।

उधर, भारी भरकम कर्ज के नीचे दबी सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया (Air India) को बेचने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सरकार ने साल 2018 में एयर इंडिया (Air India) में अपनी 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी की थी, लेकिन इसके लिए कोई खरीदार ही नहीं मिला। उसके बाद इसे पूरी तरह बेचने की कवायद शुरू की गई आपको बता दें कि Air India पर कुल 43 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें से 22 हजार करोड़ रुपये एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड को ट्रांसफर किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने एयर इंडिया और उसकी सहायक एयर इंडिया एक्सप्रेस की 100 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री की योजना पर काम कर रही है। साथ ही ग्राउंड हैडलिंग कंपनी, एयर इंडिया सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में भी 50 फीसदी विनिवेश की योजना है। विनिवेश के तहत मुंबई में एयर इंडिया बिल्डिंग और दिल्ली में एय़रलाइंस हाउस की भी बिक्री होगी। सरकार ने संसद में एक सवाल का जवाब में बताया था कि अगर एयर इंडिया का प्राइवेटाइजेशन नहीं किया जाता है तो उसे बंद करना पड़ेगा। वहीं, एयर इंडिया के कर्मचारी यूनियन इसके विनिवेश प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं।

उद्योगपति जेआरडी टाटा ने साल 1932 में Air India की स्थापना की थी। लेकिन उस समय इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। शुरूआती दौर में टाटा एयरलाइंस मुंबई के जुहू के पास एक मिट्टी के मकान से संचालित होता था। उस वक़्त ‘टाटा एयरलाइंस’ के पास दो छोटे सिंगल इंजन वाले हवाई जहाज़, दो पायलट और तीन मैकेनिक हुआ करते थे। साल 1933 से टाटा एयरलाइंस ने व्यावसायिक उड़ानें शुरु की। आजादी के बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और नाम ‘एयर इंडिया’ रख दिया गया।

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