एयर इंडिया की हुई घर वापसी 68 साल बाद एक बार फिर आधिकारिक रूप से टाटा के हाथों में कमान

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नई दिल्ली, टाटा सन्स की मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई है। एयर इंडिया खरीदने के लिए उसकी लगाई हुई बोली पर सरकार की मुहर लग गई है और अब नेशनल कैरियर टाटा की हो चुकी है।

18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर टाटा सन्स की टैलेस प्राइवेट लिमिटेड इस नीलामी की विजेता बनी है। इस साल दिसंबर तक सारा लेन-देन पूरा हो जाने की उम्मीद है। यह घोषणा डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट के सेक्रेटरी तुहिन कांत पांडे ने की है। बता दें कि इस नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही करीब 68 साल बाद टाटा कंपनी को एयर इंडिया पर मालिकाना हक फिर से मिल गया है।

 

डीआईपीएएम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने इस नीलामी के परिणाम की घोषणा करते हुए कहा है कि, ‘टाटा संस की टैलेस प्राइवेट लिमिटेड 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर विजेता बनी है। लेन-देन दिसंबर 2021 के अंत तक बंद होने की उम्मीद है।’ टाटा संस ने 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर स्पाइसजेट के अजय सिंह की 15,000 करोड़ रुपये की बोली को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते ही कर्ज में दबी एयर इंडिया की बोली का मूल्यांकन करना शुरू किया था। ऐसी खबरें पहले से थीं कि टाटा ग्रुप फ्रंट रनर है, लेकिन इसकी पुष्टि होनी बाकी थी। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इस बोली के लिए रिजर्व प्राइस कितनी रखी गई थी।

बता दें कि केंद्र सरकार कई वर्षों से नेशनल कैरियर को बेचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कोई सक्षम खरीदार नहीं मिल पा रहा था। एयर इंडिया के पास 127 हवाई जहाज हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड को मिलाकर इंटरनेशनल मार्केट में इसका बाकी भारतीय एयरलाइंस की तुलना में 50.64 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण है। इस समय एयर इंडिया 42 अंतरराष्ट्रीय जगहों के लिए अपनी सेवाएं उपलब्ध करवाता है। सरकार एयर इंडिया में अपने सारे शेयर बेच रही है। टाटा ग्रुप के पास पहले से ही एयरएशिया में 84% और विस्तारा में 51% हिस्सेदारी है।

हालांकि एयर इंडिया पर मालिकाना हक अब टाटा ग्रुप का हो गया है, लेकिन शर्त के मुताबिक उसे आने वाले 5 साल तक ‘महाराजा’ का लोगो ही इस्तेमाल करना होगा। तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि टाटा ग्रुप पांच साल बाद चाहे तो एयर इंडिया का नाम और लोगो किसी को दे सकता है, लेकिन यह सिर्फ भारतीय यूनिट या व्यक्ति को ही दे सकेगा। यानी कोई भी विदेशी या विदेशी इकाई इसे नहीं हासिल कर सकता।

दरअसल, एयर इंडिया का इतिहास टाटा ग्रुप से ही जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत महशूहर उद्योगपति जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयर सर्विसेज के नाम से की थी और 1948 में उन्होंने ही एयर इंडिया इंटरनेशनल की स्थापना की थी। इसी साल बॉम्बे-लंदन के बीच इस सेवा की शुरुआत भी गई थी। लेकिन, 1953 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण करके इसका कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया था।

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