इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग से की 2022 के इलेक्शन टालने की अपील, ओमिक्रोन के बढ़ते प्रभाव का दिया हवाला

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प्रयागराज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देश और विदेशों में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बढ़ते प्रभाव को लेकर आज देश के प्रधानमंत्री और चुनाव आयुक्त से अनुरोध किया है कि चुनाव टालते पर विचार करें. कोर्ट ने अपील की कि आगामी विधानसभा चुनाव में इस तीसरी लहर से जनता को बचाने के लिए राजनीति पार्टियों की तरफ से भीड़ एकत्रित कर चुनावी रैलियों पर रोक लगाएं।

राजनीतिक पार्टियों से कहा जाय कि वह चुनाव प्रचार टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से करें. प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुए हाईकोर्ट जज ने कहा कि वह पार्टियों की चुनावी सभाएं और रैलियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए. प्रधानमंत्री चुनाव टालने पर भी विचार करें, क्योंकि जान है तो जहान है. यह आदेश जस्टिस शेखर कुमार यादव ने उत्तर गिरोहबंद कानून के तहत जेल में बंद आरोपी संजय यादव की जमानत मंजूर करते हुए दिया है. संजय यादव के खिलाफ इलाहाबाद के थाना कैंट एरिया में मुकदमा दर्ज है।

हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि आज इस न्यायालय के समक्ष लगभग चार सौ मुकदमें सूचीबद्ध हैं. इसी प्रकार से रोज मुकदमें इस न्यायालय के समक्ष सूचीबद्व होते हैं जिसके कारण अधिक संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित होते हैं और उनके बीच किसी भी प्रकार की सोशल डिस्टेंस नहीं होती है. अधिवक्ता आपस में सटकर खडे़ होते हैं. ये ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के मरीज बढ़ते जा रहे हैं और तीसरी लहर आने की सम्भावना है।

हाईकोर्ट ने कहा कि न्यूज़ पेपर के अनुसार 24 घण्टें में छः हजार नये मामले मिले हैं और 318 लोगों की मौतें हुई है और यह समस्या रोज बढ़ती जा रही है. इस भयावह महामारी को देखते हुए चीन, नीदरलैण्ड, आयरलैण्ड, जर्मनी, स्कार्टलैण्ड जैसे देशों ने पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लगा दिया है. ऐसी दशा में महानिबन्धक, उच्च न्यायालय इलाहाबाद से आग्रह है कि वह इस विकट स्थिति से निपटने के लिए नियम बनायें।

अभी पिछली दूसरी लहर में हमने देखा है कि लाखों की संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हुए है और लोगों की मृत्यु हुई है. ग्राम पंचायत के चुनाव और बंगाल विधानसभा के चुनाव ने लोगों को काफी संक्रमित किया जिससे लोग मौत के मुंह में गये. आज फिर से चुनाव उत्तर प्रदेश, विधानसभा का निकट है. इसके लिए सभी पार्टियां रैली, सभायें आदि करके लाखों की भीड़ जुटा रही है, जहां पर किसी भी तरह से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना सम्भव नहीं है. इसे समय रहते नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से कहीं अधिक भयावह होगी. ऐसी दशा में चुनाव आयुक्त से न्यायालय का अनुरोध है कि इस प्रकार की रैली, सभायें आदि जिसमे भीड़ एकत्रित हो उस पर तत्काल रोक लगायें और चुनावी पार्टियों को आदेशित करें कि वह अपनी रैली भीड़ जुटाकर न करें बल्कि टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से करें. समभव हो सके तो फरवरी में होने वाले चुनाव को भी एक-दो माह के लिए टाल दें क्योंकि जीवन रहेगा तो चुनावी रैलियां, सभायें आगे भी होती रहेगी, और जीवन का अधिकार हमें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में भी दिया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री जिन्होंने भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना मुफ्त टीकाकरण का जो अभियान चलाया है वह प्रशंसनीय है और न्यायालय उसकी प्रशंसा करती है. माननीय प्रधानमंत्री से अनुरोध करती है कि इस भयावह महामारी की स्थिति को देखते हुए कडे़ कदम उठाते हुए रैली, सभायें और होने वाले चुनाव को रोकने और टालने के बारे में विचार करें. कोर्ट ने इस आदेश की एक प्रति महानिबन्धक, उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं चुनाव आयुक्त, केन्द्र सरकार को प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

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