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क्या आपको भी सुबह उठने के बाद चक्कर आते हैँ यदि हाँ तो इसे ज़रूर पढ़ें, क्या हैँ कारण और क्या हैँ निवारण

लखनऊ, लोगों को सुबह उठने से बाद अचानक से चक्कर आने की समस्या का सामना करना पड़ता है. सुबह-सुबह चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे डिहाईड्रेशन और पोषक तत्वों की कमी आदि. सुबह के समय चक्कर आने के कई लक्षण होते हैं इसलिए ऐसे में जरूरी है कि अगर आपको इस समस्या का सामना काफी ज्यादा करना पड़ रहा है तो आप डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी इस समस्या के बारे में बताएं.

तो आइए जानते हैं सुबह के समय चक्कर आने के क्या कारण होते हैं और कैसे इस समस्या को ठीक किया जा सकता है.

एनीमिया- एनीमिया की समस्या का सामना तब करना पड़ता है जब आपके शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं ऑक्सीजन को शरीर में अच्छे से नहीं पहुंचा पातीं. जब सही मात्रा में ऑक्सीजन आपके दिमाग में नहीं पहुंच पाती तो इससे चक्कर आने लगते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है.

एनीमिया के अन्य लक्षणों में शामिल हैं-

सांस लेने में दिक्कत

हाथ-पैर ठंडे पड़ना

उठने या बैठने में काफी ज्यादा चक्कर आना

कमजोरी

स्किन का पीला पड़ना

सिरदर्द

एनीमिया की समस्या होने पर आपको आयरन से भरपूर चीजें और सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए.

डिहाईड्रेशन- शरीर को अच्छी तरह से काम करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी और बाकी फ्लूइड्स की जरूरत होती है. जब शरीर में पानी और फ्लूइड की मात्रा कम होती है तो दिमाग तक ऑक्सीजन का सप्लाई नहीं हो पाता जिस कारण चक्कर आने की समस्या का सामना करना पड़ता है.

डिहाईड्रेशन के अन्य लक्षणों में शामिल हैं-

भ्रम होना

थकान

उठते-बैठते समय चक्कर आना

कमजोरी

गर्मी बर्दाश्त ना होना

अगर आपको डिहाईड्रेशन के कारण चक्कर आने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो जरूरी है कि आप पानी और बाकी लिक्विड चीजों का सेवन ज्यादा से ज्यादा मात्रा में करें ताकी आपके शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके.

व्यक्ति को एक दिन में लगभग 8 गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए. लेकिन उम्र, वजन और आप किस लेवल की फिजिकल एक्टिविटीज करते हैं इसके आधार पर आपको फ्लूइड्स की जरूरत ज्यादा हो सकती है.

बिनाइन पेरोक्सीमल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी)- अगर सिर घुमाने या करवट लेने पर थोड़े-थोड़े समय के लिए बार-बार चक्कर आते हैं तो यह कान से संबंधित समस्या हो सकती है, जिसे बिनाइन पेरोक्सीमल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी) कहते हैं. पेरोक्सीमल का मतलब अचानक से चक्कर आना है जिसका असर थोड़े टाइम के लिए ही रहता है.

बिनाइन पेरोक्सीमल पोजिशनल वर्टिगो के अन्य लक्षणों में शामिल हैं-

मतली

उल्टी आना

अस्थिरता

आसपास की चीजें घूमती हुई महसूस होना

यह समस्या कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप ही ठीक हो जाती है. ऐसे में इस बीमारी को ज्यादा गंभीर नहीं माना जाता है लेकिन अगर आपको लगातार इसका सामना करना पड़ रहा है तो जरूरी है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें. इस समस्या को कुछ खास एक्सरसाइज के जरिए ठीक किया जा सकता है.

ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन- ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन की समस्या तब होती है जब बैठने और लेटने की स्थिति से खड़े होने पर अचानक से ब्लड प्रेशर के लेवल में गिरावट आ जाती है. इसे ऑर्थोस्टेटिक या पोस्टुरल हाइपोटेंशन के रूप में जाना जाता है. ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन की समस्या रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थों की कमी के कारण हो सकती है.

ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन के लक्षणों में शामिल हैं-

भ्रम होना

कमजोरी

धुंधला दिखाई देना

बेहोश होना

ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन का इलाज स्थिति के कारण पर निर्भर करता है. अगर आपको ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन के एपिसोड आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

विटामिन बी12 की कमी– हमारे शरीर को कई तरह के विटामिन्स की जरूरत होती है जिसमें से एक विटामिन बी 12 होता है. विटामिन बी12 एक ऐसा पोषक तत्व है जो हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए काफी जरूरी माना जाता है. लाल रक्त कोशिकाओं और डीएनए के निर्माण के साथ ही विटामिन बी 12 दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

शरीर में विटामिन बी 12 की कमी होने पर कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे- त्वचा का पीला पड़ जाना, जीभ में, दाने या फिर लाल हो जाना, मुंह में छाले की समस्या, आंखो की रोशनी कम होना, डिप्रेशन, कमजोरी और सुस्ती , सांस फूल जाना, सिरदर्द और कान बजना, भूख कम लगना, याद्दाश्त कमजोर होना.

विटामिन बी 12 की कमी के कारण एनीमिया की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण चक्कर आने लगते हैं. इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करें जो विटामिन बी 12 से भरपूर होती है. इसके अलावा मार्केट में विटामिन बी 12 की कई सप्लीमेंट्स भी मिलती हैं.

ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक(TIA)- ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक एक तरह का स्ट्रोक है, जो सिर्फ कुछ मिनट के लिए ही रहता है. जब कोई व्यक्ति TIA से ग्रस्त होता है तो उसके मतिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त का प्रवाह रुक जाता है. इसे मिनी स्ट्रोक के नाम से भी जाना जाता है. आमतौर पर ऐसा स्ट्रोक आने के कुछ घंटे या दिन पहले होता है.

ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक के लक्षणों में शामिल हैं-

सुन्न पड़ना

बात करने में दिक्कत

भ्रम की स्थिति

चलने में दिक्कत

दिखने में दिक्कत का सामना करना

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