एक अमेरिकी शोध में दावा : कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट पर वैक्सीन भी बेअसर, कई देशों में तेज़ी से फैल रहा है

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वाशिंगटन, कोरोना वायरस का कहर दुनिया में अभी भी जारी है. कई देशों में कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट अपना असर दिखा रहे हैं. इस बीच एक ऐसी स्टडी सामने आई है, जो चिंता बढ़ाती है. कोरोना का लैम्बडा वैरिएंट जो कई देशों में तेज़ी से फैल रहा है, उसपर वैक्सीन का असर भी नहीं हो रहा है. ऐसा दावा अमेरिका में की गई एक स्टडी में किया गया है.

न्यूयॉर्क पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक, अमेरिका में इस वक्त डेल्टा वैरिएंट के कारण हाहाकार मचा है, लेकिन लैम्बडा वैरिएंट जो तेज़ी से बढ़ रहा है वो और भी खतरनाक है, क्योंकि ये वैक्सीन से भी धीमा नहीं होगा. bioRxiv की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि जापान में अब लैम्बडा वैरिएंट को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है. इस स्टडी में चिली का उदाहरण दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि चिली में 60 फीसदी से अधिक जनसंख्या वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ ले चुकी है. लेकिन इसके बाद भी चिली में जब से लैम्बडा के केस सामने आए हैं, मामलों की संख्या में तेज़ी आई है.

इससे ये साबित होता है कि लैम्बडा वैरिएंट वैक्सीन से पैदा होने वाली एंटीबॉडी को भी मात दे रहा है. बता दें कि लैम्बडा वैरिएंट दिसंबर 2020 में साउथ अमेरिकी देशों में मिला था. जो धीरे-धीरे कई हिस्सों में अपने पैर पसारता चला गया. लैटिन अमेरिका के करीब 26 देशों में इस वक्त इस वायरस का असर है.

लैम्बडा वैरिएंट को अभी तक वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया गया है. अमेरिकी डिसीज सेंटर के मुताबिक, कुछ हदतक mRNA वैक्सीन लैम्बडा वैरिएंट को काबू में करती हुई दिखती है, लेकिन अभी इसका व्यापक असर नहीं दिखा है.

हालांकि, इस सबके बावजूद अमेरिका में लोगों से अपील की जा रही है कि सभी लोग जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों डोज़ ले लें. ताकि अगर कोई कोरोना की चपेट में आता है, तो कम से कम अस्पताल जाने या गंभीर रूप से बीमार होने से बच सके.

 

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