बीजेपी को देश से खदेड़े बिना लोकतंत्र को बचाना मुश्किल : ममता बनर्जी

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नई दिल्ली, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि न्यायपालिका ही लोकतंत्र को बचा सकती है.

टीएमसी प्रमुख ने कहा, “देश को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो लोग हमें माफ़ नहीं करेंगे.”

ममता बुधवार को यहाँ कालीघाट स्थित अपने आवास के सामने बने मंच से सालाना शहीद रैली को वर्चुअल तरीक़े से संबोधित कर रही थीं. इस साल ख़ास बात यह रही कि पहली बार ममता ने अपना ज़्यादातर भाषण हिंदी और अंग्रेज़ी में दिया. बीच-बीच में वे बांग्ला भी बोलती रहीं।

पहली बार बंगाल से बाहर निकलने के क़वायद के तहत टीएमसी ने उनकी इस रैली का दिल्ली, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात तक प्रसारण किया. कोलकाता में उनकी रैली में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर मौजूद थे, जबकि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एनसीपी नेता शरद पवार, कांग्रेस के पी चिदंबरम और सपा के रामगोपाल यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने उनका भाषण सुना.

ममता ने कहा, “मैं नहीं जानती 2024 में क्या होगा. लेकिन इसके लिए अभी से तैयारियाँ करनी होंगी. हम जितना समय नष्ट करेंगे, उतनी ही देरी होगी. बीजेपी के ख़िलाफ़ तमाम दलों को मिल कर एक मोर्चा बनाना होगा.”

उन्होंने शरद पवार और चिदंबरम से अपील की कि वे 27 से 29 जुलाई के बीच दिल्ली में इस मुद्दे पर बैठक बुलाएँ. ख़ुद ममता भी उस दौरान दिल्ली के दौरे पर रहेंगी. ममता का कहना था कि देश और इसके लोगों के साथ ही संघवाद के ढांचे को बचाने के लिए हमें एकजुट होना होगा.

टीएमसी नेता ने कहा, “बीजेपी को देश से खदेड़े बिना लोकतंत्र को बचाना मुश्किल होगा. जब तक ऐसा नहीं होता हर राज्य में खेला होगा. हमने बंगाल में एक बार खेला दिखा दिया है. अब फिर भगवा पार्टी को खेला दिखाएँगे.”

ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने देश की आज़ादी को ख़तरे में डाल दिया है और लोकतंत्र के तमाम स्तंभों का गला घोंट दिया है.

उनका कहना था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब हज़ारों लोगों की मौत हो रही थी, तब प्रधानमंत्री समेत पूरी केंद्र सरकार बंगाल चुनाव जीतने के लिए डेली पैसेंजर बन गई थी. लेकिन राज्य के लोगों ने उन्हें माकूल जवाब दे दिया.

केंद्र पर कोरोना से निपटने में पूरी तरह नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि सरकार ज़रूरी दवाएँ, वैक्सीन और ऑक्सीजन मुहैया नहीं करा सकी. नतीजतन चार लाख लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा.

उन्होंने उत्तर प्रदेश की सराहना के लिए भी प्रधानमंत्री की आलोचना की और कहा कि उनको ऐसा करते हुए शर्म आनी चाहिए थी. उत्तर प्रदेश से शव गंगा में बह कर कभी बिहार पहुँचते रहे तो कभी बंगाल.

पेगासस मामले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने इस अब तक का सबसे बड़ा स्कैंडल बताया. उन्होंने अपना फ़ोन दिखाते हुए कहा- मैंने अपना फ़ोन प्लास्टर कर दिया है. इसी तरह दिल्ली की सत्ता से बीजेपी को भी प्लास्टर लगा कर बाहर करना होगा.

उनका कहना था, “फ़ोन टैपिंग की बात मुझे पहले से मालूम थी. इसी डर से मैं चाह कर भी पवार, चिदंबरम, केजरीवाल या नवीन पटनायक जैसे नेताओं से फ़ोन पर बात नहीं कर पाती थी. बीजेपी ने चुनाव के दौरान अभिषेक और पीके के साथ हुई मेरी बैठक की बातें भी रिकॉर्ड कर ली थी. बीजेपी को अपने मंत्रियों पर भी भरोसा नहीं है.”

इस सिलसिले में ममता ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का भी ज़िक्र किया.

प्रधानमंत्री मोदी पर बरसते हुए ममता ने कहा कि वे उनकी निजी आलोचक नहीं हैं. राजनीति में शिष्टाचार लाजिमी है. लेकिन बंगाल की सत्ता हासिल करने के लिए इतना नीचे गिरने के बावजूद उनको कुछ हासिल नहीं हुआ. पूरी दुनिया की निगाहें बंगाल चुनाव पर टिकी थीं. लेकिन लोगों ने उनको ठुकरा दिया.

टीएमसी नेता का कहना था कि मन की बात से अगर आम लोगों को कोई फ़ायदा नहीं हो, तो सिर्फ ज्ञान देने के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए.

उनका आरोप था कि सरकार ग़रीबों के हित और विकास पर ख़र्च करने की बजाय जासूसी पर मोटी रकम ख़र्च कर रही है. सरकार के पास कोरोना की संभावित तीसरी लहर को रोकने की भी कोई योजना नहीं है. राज्यों को ज़रूरत के मुक़ाबले दवाओं और वैक्सीन की सप्लाई नहीं की जा रही है. ममता ने बीजेपी पर धमकी की राजनीति करने और चुनाव जीतने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।

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