रुपया रसातल में डॉलर आसमान में, रुपये ने छुआ सबसे निचला स्तर पहुँचा 83 के पार

नई दिल्ली, विदेशी बाजारों में डॉलर के मजबूत होने और विदेशी पूंजी की सतत निकासी के बीच अंतर-बैंक विदेशीमुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 61 पैसे की गिरावट के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर 83.01 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर होने से भी रुपये पर असर पड़ा। अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 82.32 पर मजबूत खुला, लेकिन बाद में तेजी जाती रही। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 146.59 अंक की तेजी के साथ 59,107.19 अंक पर पहुंच गया।

साल 2010 में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कीमत 50 रुपए के करीब थी तो वहीं 12 सालों के बाद इसमें 65 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार गिर रहे रुपए से मुश्किलें बढ़ा दी है। ये गिरावट कहां तक जाकर रुकेगी ये अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। दुनियाभर में मंडरा रहे मंदी की आशंकाओं के बीच इक्विटी बाज़ारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है जिसका असर भारतीय रुपए पर देखने को मिल रहा है।

रुपए में गिरावट का असर

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गिरावट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। रुपए में लगातार गिरावट से भारतीय तेल कंपनियों को क्रूड ऑयल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। आयात पर खर्च अधिक होने से चीजें महंगी होती है। खाद्य तेलों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामानों और उन तमाम चीजों की कीमतों बढ़ने लगती है, जिनका आयात किया जाता है। वहीं विदेशों में पढ़ने वालों का खर्च बढ़ जाता है।

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