पासदारे इल्म-अदब, दार्शनिक और निहायत गरीब-परवर थे डॉ. कल्बे सादिक : आरिफ मोहम्मद खान

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लखनऊ , पद्मभूषण स्वर्गीय डॉ. कल्बे सादिक को लोगों ने फख्रे मिल्लत, अलमदारे इत्तेहाद और न जाने कितने खिताब दिये। वह यकीनी तौर पर पासदारे इल्म-अदब, दार्शनिक और निहायत गरीब-परवर थे। डॉ. कल्बे सादिक को फख्रे मिल्लत कहना इंसाफ नहीं है वे फख्रे हिन्दुस्तान हैं। डॉ. कल्बे सादिक को सच्ची श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में फूल और गुलदस्ता देने के बजाए कलम और नोटबुक देकर दी जा सकती है। यह बात केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोमवार को कैफी आजमी अकादमी में आयोजित याद-ए-सादिक को सम्बोधित करते हुए कही। प्राइम मीडिया सोल्यूशन और फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

उन्होंने कहा कि डॉ. कल्बे सादिक के साथ बहुत से कार्यक्रमों में शामिल होने का मौका मिला, जिससे उनकी मोहब्बत और शफकत मिली। उन्होंने डॉ. सादिक के शिक्षा के मिशन पर कहा कि डॉ. सादिक कहते थे इल्म हासिल नहीं करेंगे तो हमारा इस्तेमाल होता रहेगा। कलम की ताकत यह है कि लिखे अल्फाज इंसान के मरने के बाद भी चमकते रहते हैं और आज वर्तमान दौर में बयान भी वही हैसियत अख्तियार कर गया है।

डॉ. सादिक की तकरीर और तहरीरों से आज भी सबक हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुरान में इल्म हासिल करने का जरिया कलम बताया गया है तो जिस चीज को याद करना है उसे रटने के बजाए लिख लें। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में अगर डॉ. कल्बे सादिक की बात मानी जाती तो मुल्क में अमन-चैन बना रहता। इसी तरह 1986 में तीन तलाक जो शरीयत थी 2017 में उसे बिदअत बता खुद बदलने को तैयार हो गये। उन्होंने कहा कि डॉ. सादिक इल्म पर बहुत जोर देते थे। उन्हें पढिय़े, सुनिये और समझ कर उसका फायदा उठाइये तो हमारी जिंदगी न सिर्फ आसान होगी बल्कि राहें हमवार होंगी।

उन्होंने कहा कि खुद की आलोचना और वह बातें करना जो प्रसिद्धि का दर्जा नहीं रखती, यह डॉ. सादिक जैसा एक आलिम-ब-अमल ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि सर सैय्यद अहमद खां बड़े आलिम थे, लेकिन हम उनसे फायदा न उठा सके। आज तक उनकी तहरीर और तकरीरें नहीं छपीं। सर सैय्यद की तहरीर और तकरीर को छाप कर लोगों को मुहैया कराएं ताकि लोगों को पता चले कि सर सैय्यद क्या थे। उन्होंने कार्यक्रम में यूनिटी कॉलेज के छात्रों के गीता-कुरान, बाइबिल और गुरुग्रंथ साहिब के पाठ की सराहना करते हुए कहा कि यूनिटी कॉलेज का यह प्रयास प्रशंसनीय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शारिब रुदौलवी ने कहा कि जो लोग दूसरों के लिए जीते हैं, हमेशा जिन्दा रहते हैं। डॉ. सादिक ने जो काम दूसरों के लिए किये, वह सबको पता हैं।

उन्होंने कई संस्थाएं बनाईं, जिनसे आज हजारों की संख्या में लोग फायदा उठा रहे हैं। यूनिटी कॉलेज, आईटीआई, जैनुलआब्दीन हॉस्पिटल और एरा हास्पिटल में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम को मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना डॉ. कल्बे सिब्तैन नूरी सहित अन्य ने भी सम्बोधित किया। इस मौके पर आधुनिक शिक्षा के लिए शिया पी.जी. कॉलेज, चिकित्सा सेवाओं में उत्कृष्टï सेवाओं के लिए एरा विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. फरजाना मेहदी, महिला सशक्तीकरण के लिए तकदीस फातिमा, समाजसेवा के लिए अमरोहा के आलम लतीफ और साहित्यिक सेवाओं के लिए फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन अतहर काजमी ने किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का आगाज यूनिटी कॉलेज के छात्र फारिस अब्बास ने तिलावते कलामे पाक, मजीदा रिजवी ने बाइबिल और अनमता फातिमा ने गीता के श्लोक पढ़ कर किया। कार्यक्रम का आरम्भ और समापन शुआ फातिमा गल्र्स कॉलेज की छात्राओं ने राष्ट्रगान से किया

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