बाहर खाना अब पड़ेगा महंगा, आगामी एक अक्टूबर से एफएसएसएआई का रजिस्ट्रेशन नंबर खाने के बिल पर लगाना जरूरी

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नई दिल्ली, महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं या सड़क के किनारे के ढाबे में, लेकिन आप खाने की क्वालिटी से संतुष्ट नहीं हैं और खाना खाने के बाद किसी बीमारी का शिकार होते हैं तो आप भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से शिकायत कर सकते हैं।

एफएसएसएआई के सीईओ के अनुसार आगामी एक अक्टूबर से एफएसएसएआई का रजिस्ट्रेशन नंबर खाने के बिल पर लगाना जरूरी कर दिया गया है, जिससे की खाने की गुणवत्ता और वैधता को सरकार सही तरीके से जांच सके.

एफएसएसएआई यानी फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रेस्टोरेंट और ढाबे के मालिकों के लिए आगामी पहली अक्टूबर से खाने के बिल पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर या फिर रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना जरूरी कर दिया है. जिन रेस्टोरेंट मालिक का बीस लाख से ऊपर का कारोबार है उन्हें लाइसेंस और जिनके पास बीस लाख रुपए से नीचे का कारोबार है, उन्हें रजिस्ट्रेशन नंबर अपने बिल पर अंकित करना जरूरी कर दिया गया है।

एफएसएसएआई के सीईओ ने दावा किया कि इस नए नियम के आने से रेस्टोरेंट अथवा फूड ऑपरेटर्स के खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने में आसानी होगी. उन्होंने कहा कि खाने की क्वालिटी चेक करने के लिए एफएसएसएआई ने चलता फिरता लैब की शुरुआत भी की है।

खाने की गुणवत्ता चेक करने के लिए चलता फिरता एक लैब भी बनाया गया है. अरुण सिंघल ने कहा कि इस लैब में महज पांच मिनट में खाने की गुणवत्ता चेक हो सकती है, चूंकि ये मोबाइल वैन है तो इसे लाने और ले जाने में कोई परेशानी नहीं है. इस लैब में दो टेक्नीशियन होंगे, जो तत्काल प्रभाव के खाने की गुणवत्ता की जांच करेंगे।

उन्होंने बताया कि आगामी एक अक्टूबर से अगर खाने के बिल पर लाइसेंस नंबर या फिर फिर रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज नहीं किया तो सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर फूड सेफ्टी ऑफिसर चाहे तो दुकान बंद कर उसके मालिक के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल जाने तक की सजा है।

आमतौर पर त्योहार के मौसम में ये देखा जाता है कि बड़े पैमाने पर मिठाइयों में मिलावट की शिकायत आती है. एफएसएसएआई के सीईओ ने कहा कि ऐसे खास मौकों पर इस तरह के वैन काफी कारगर साबित होंगे. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में 100 से ज्यादा वैन हैं, लेकिन आने वाले समय में देश के हर जिले में 1 मोबाइल लैब उपलब्ध कराने की योजना है.

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