कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद भी दिखें ये लक्षण तो हो सकता है ख़तरा, जानिए लक्षणों के बारे में

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नई दिल्ली, कुछ राज्यों को छोड़कर अब बाकी पूरे देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफी कमी आई है और इस वजह से जगह-जगह दफ्तर खुल गए हैं, स्कूल खोले जा रहे हैं। लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।

इस महामारी के खिलाफ टीकाकरण की अगर बात करें तो देश में अब तक 56 करोड़ छह लाख से अधिक कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं। हर दिन लाखों लोगों को टीका लगाया जा रहा है, ताकि इस वायरस को खत्म किया जा सके। कहा जा रहा है कि भारत में दो से 18 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी कोविड-19 वैक्सीन अक्तूबर से उपलब्ध हो जाएगी। वैसे तो कोरोना वैक्सीन लगवाने के गंभीर साइड-इफेक्ट नहीं होते, लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक ट्वीट के माध्यम से आगाह किया है कि किसी भी कोविड-19 वैक्सीन को लगवाने के 20 दिनों के भीतर होने वाले लक्षणों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद कंपकंपी महसूस होना, हल्का बुखार, इंजेक्शन लगने की जगह पर सूजन और हल्का दर्द, बदन दर्द और थकान जैसे साइड-इफेक्ट तो आम हैं, इनसे घबराने की जरूरत नहीं है। ये लक्षण एक-दो दिन में अपने आप चले जाते हैं।

इन लक्षण से हो जाएं सावधान

  • सांस की तकलीफ (सांस लेने में कठिनाई)
  • छाती में दर्द
  • उल्टी होना या लगातार पेट दर्द होना
  • धुंधला दिखाई देना या आंखों में दर्द होना
  • तेज या लगातार सिरदर्द
  • शरीर के किसी भी अंग में कमजोरी होना
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार उल्टी होना
  • दौरा पड़ना (उल्टी के साथ या उल्टी के बिना) (दौरा पड़ने के पिछले इतिहास की अनुपस्थिति में)
  • इंजेक्शन लगने की जगह से दूर त्वचा पर रक्त के छोटे या बड़े निशान होना
  • कोई अन्य लक्षण या स्वास्थ्य स्थिति जो प्राप्तकर्ता या परिवार के लिए चिंता का विषय है

वैक्सीन लगवाने के 20 दिनों के भीतर ऐसे गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के नए-नए वैरिएंट से बचने के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। चूंकि अभी देश में डेल्टा वैरिएंट को लेकर खतरा बना हुआ है, ऐसे में चेन्नई में आईसीएमआर द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि डेल्टा वैरिएंट में टीका नहीं लिए लोगों के साथ-साथ टीका ले चुके लोगों को भी संक्रमित करने की क्षमता है, लेकिन टीका ले चुके लोगों में इसकी मृत्यु दर कम है।

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