जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कैसे करें?, गोपाल की पूजा के नियम क्या हैं और कृष्ण के चमत्कारी मंत्र कौन से हैं?

जन्माष्टमी, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 अगस्त को है। ऐसे में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव 19 अगस्त को मनाना बेहद शुभ और अच्छा रहेगा। पंचांग के मुताबिक, इस जन्माष्टमी पर 8 तरह का शुभ योग भी बन रहा है।  ये 8 शुभ योग -महालक्ष्मी, बुधादित्य, ध्रुव, छत्र, कुलदीपक, भारती, हर्ष और सत्कीर्ति योग हैं, जो कि पूजा की दृष्टि से शुभ फलदायी होते हैं। आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कैसे करें?, गोपाल की पूजा के नियम क्या हैं और कृष्ण के चमत्कारी मंत्र कौन से हैं?

श्रीकृष्ण का श्रृंगार कैसे करें .
पीले वस्त्र  .
जन्माष्टमी पर कान्हा के आगमन पर उनका अभिषेक कर पीले वस्त्र पहनाएं.

रंग बिरंगे वस्त्रों से कान्हा प्रसन्न होते हैं. पीतांबर कृष्ण को बेहद प्रिय है।

वैजयंती माला
जन्माष्टमी पर लड्‌डू गोपाल के श्रृंगार में कान के कुंडल बाजूबंध, कमरबंध, हाथ के कड़े, पायल  के साथ वैजयंती माला उन्हें जरूर पहनाएं।

मोरपंख 
मोरपंख के बिन कृष्ण की कल्पना नहीं की जा सकती. मान्यता है कि मोरपंख राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है इसलिए कान्हा हमेशा इसे अपने सिर पर सजाते हैं।

चंदन
सुगंधित चंदन की खुशबू बाल गोपाल को बहुत पसंद है। चंदन विभिन्न प्रकार के होते हैं। सफेद चंदन, हरि चंदन, गोमती चंदन आदि. कान्हा का गोपी चंदन से श्रृंगार उत्तम माना जाता है।

बांसुरी
बांसुरी के बिना कान्हा अधूरे माने जाते हैं। मान्यता है कि मुरली में कृष्ण का वास होता है। जन्माष्टमी पर चांदी या कोई भी छोटी सी बांसुरी कान्हा के हाथ में जरूर रखें।

बाल गोपाल की पूजा के नियम
स्नान
घर में बाल गोपाल की मूर्ति है तो प्रतिदिन इन्हें स्नान करना चाहिए. शंख में स्वच्छ जल भरकर कान्हा का स्नान करना उत्तम होता है। अब कृष्ण जी के स्नान के पानी को तुलसी के गमले में डाल दें।

नए वस्त्र
स्नान के बाद कान्हा को साफ वस्त्र पहनाएं। ध्यान रखें कि श्रीकृष्ण को एक बार जो कपड़े पहना चुके हैं उन्हें दोबारा बिना धोए उपयोग में न लें। चंदन, आभूषण, से उनका श्रृंगार करें। श्रृंगार के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है।

भोग
धर्म ग्रंथों के अनुसार कान्हा को दिन में चार बार भोग लगाना चाहिए। माखन, दही, मिश्री, खीर का भोग लगा सकते हैं।

अकेला न छोड़ें
एक बार घर में कान्हा को स्थापित करने के बाद उन्हें कभी अकेला न छोड़े। लंबे समय के लिए कहीं बाहर जा रहे हों तो श्रीकृष्ण को भी साथ ले जाएं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद कान्हा की रोजाना पूजा करना बहुत जरूरी है।

जन्माष्टमी के 5 लाभकारी मंत्र 
कृं कष्णाय नम:
ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा
गोकुल नाथाय नम:
ऊं क्लीम कृष्णाय नमः
ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:।।

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