जानिए किसको ज़रूरत है कोरोना बूस्टर शॉट की और ये कितना है कारगर

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नई दिल्ली: कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन को सबसे कारगर हथियार माना जा रहा है. देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान तेजी से चल रहा है. वहीं कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज को लेकर कई बातें सामने आ रही है. इस बीच स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने 27 जुलाई को संसद में बताया कि केंद्र को अभी तक कोविड-19 वैक्सीन बूस्टर डोज के बारे में कोई सिफारिश नहीं मिली है।

सरकार की ओर से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि भारत को दूसरी पीढ़ी की कोविड​​-19 वैक्सीन के साथ बूस्टर खुराक अपनाने की आवश्यकता हो सकती है. फिलहाल भारत में कोरोना वैक्सीन की दो डोज एक निश्चित अंतराल पर दी जा रही है लेकिन

क्या वैक्सीन की दो खुराक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पर्याप्त हैं?

बूस्टर शॉट वह है जो किसी विशेष रोगजनक के खिलाफ किसी की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए दिया जाता है. जब कोविड का पहला शॉट दिया जाता है, तो यह केवल आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है. वहीं दूसरी खुराक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है, अधिक एंटीबॉडी का उत्पादन करती है और बीमारी के गंभीर रूप से बचाती है।

डॉ गुलेरिया ने कहा था कि भारत को बूस्टर शॉट्स की आवश्यकता हो सकती है और इसका परीक्षण चल रहा है. उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि हमें शायद टीकों की बूस्टर खुराक की आवश्यकता होगी क्योंकि समय बीतने के साथ प्रतिरक्षा कम हो जाती है. हम बूस्टर खुराक चाहते हैं जो विभिन्न उभरते वेरिएंट के लिए कवर हो।

वहीं राज्यसभा में भारती प्रवीण पवार का कहना था कि ‘कोविड-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज के बारे में कोई विशेष सिफारिश टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) और कोविड के लिए वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (NEGVAC) द्वारा नहीं की गई है. वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से बूस्टर खुराक पर कोई सिफारिश नहीं की गई है।

शोध से पता चला है कि बूस्टर शॉट्स शरीर को वायरस या बैक्टीरिया का पता लगाने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं. टीके के प्रकार और निर्माता के आधार पर अपने पहले शॉट के बाद बूस्टर शॉट सप्ताह, महीने या साल में भी मिल सकते हैं।

बूस्टर खुराक तुरंत प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर सकती है. यह ‘इम्यूनोलॉजिकल मेमोरी’ के आधार पर काम करता है जहां प्रतिरक्षा प्रणाली उस टीके को याद करती है जिसका शरीर पहले ही उपयोग कर चुका है. ऐसे में बूस्टर डोज तुरंत इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर देता है, जिसका असर ज्यादा देखने को मिलता है।

 

आपको बता दें कि कोरोना वायरस के वेरिएंट में डेल्टा वेरिएंट को सबसे ज्यादा खतरनाक बताया गया है. इससे निपटने के लिए बूस्टर डोज की बातें सामने आई हैं. हालांकि वैक्सीन निर्माता यह मानते हैं कि टीके वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं. हालांकि प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ वेरिएंट सुरक्षा को तोड़ रहे हैं।

 

वैक्सीन की दो खुराक के बाद तीसरी डोज लेनी चाहिए या नहीं, इस पर फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी तक बूस्टर शॉट्स को मंजूरी नहीं दी है. हालांकि इजराइल की तरह, बहरीन सहित कई मध्य पूर्वी देश पहले से ही उन लोगों को बूस्टर शॉट्स दे रहे हैं जिन्होंने पहले अपना टीकाकरण पूरा कर लिया था.

इंडोनेशियाई डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार से विशेष रूप से स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बूस्टर शॉट को हरी झंडी दिखाने का आह्वान किया है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो थाईलैंड फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए बूस्टर शॉट देने पर भी विचार कर रहा है. वहीं भारत में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का बूस्टर शॉट के लिए परीक्षण चल रहा है. हालांकि कंपनी ने कहा है कि परिणाम नवंबर 2021 में ही आएंगे।

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