मोहन भागवत ने वोटों के ध्रुवीकरण को दी धार कहा “हिंदू और मुस्लिम एक ही वंश के हैं और भारत का प्रत्येक नागरिक एक हिंदू”

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नागपुर, 2022 में कई राज्यों में होने वाले होने वाले हैं और ऐसा लगता है की आगामी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी विकास नहीं बल्कि धर्म के आधार पर जनता के बीच वोट मांगने जाएगी इसी की सुगबुगाहट के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत वोटों के ध्रुवीकरण को धार देते हुए कहा कि हिंदू और मुस्लिम एक ही वंश के हैं और भारत का प्रत्येक नागरिक एक हिंदू है। मुंबई में पुणे स्थित ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पॉलिसी फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समझदार मुस्लिम नेताओं को कट्टरपंथियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से भी मुलाकात की।

भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द मातृभूमि, पूर्वजों और भारतीय संस्कृति के बराबर था। यह अन्य विचारों का अपमान नहीं है। हमें भारतीय प्रभुत्व हासिल करने के बारे में सोचना होगा, न कि मुस्लिम प्रभुत्व के बारे में। उन्होंने कहा कि इस्लाम आक्रमणकारियों के साथ भारत आया। यह इतिहास है और इसे ऐसे ही बताया जाना चाहिए। समझदार मुस्लिम नेताओं को अनावश्यक मुद्दों का विरोध करना चाहिए और कट्टरपंथियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। जितनी जल्दी हम ऐसा करेंगे, हमारे समाज को उतना ही कम नुकसान होगा।

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू कभी किसी से दुश्मनी नहीं रखते। वो सबकी भलाई सोचते हैं। इसलिए दूसरे के मत का यहां अनादर नहीं हो सकता। जो ऐसी सोच रखता है, वह धर्म से चाहे कुछ भी हो, वह हिंदू है। भारत महाशक्ति बनेगा, लेकिन वो किसी को डराएगा नहीं। भारत विश्वगुरु के रूप में महाशक्ति बनेगा। संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि जो लोग राष्ट्र को तोड़ना चाहते हैं, वे यह कहने की कोशिश करते हैं कि ‘हम एक नहीं हैं, हम अलग हैं’। ऐसे लोगों के बहकावे में कभी नहीं आना चाहिए और किसी को इसका शिकार नहीं होना चाहिए। हम एक राष्ट्र हैं। हम एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहेंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नागपुर में समन्वय बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के अंतिम दिन पांच राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर हाल ही में तालिबान की ओर से दिए गए कश्मीर संबंधी बयान ने संघ की चिंता बढ़ा दी। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद भारत के कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों व धर्म गुरु की ओर से आ रही प्रतिक्रिया पर आरएसएस की नजर है। अब देखना ये है की आगामी चुनावों में मोहन भागवत का ये बयान वोटर को कितना लुभा पाता है।

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