अब घर पर रखे पुश्तैनी सोने पर भी लगेगी सरकारी मोहर, सरकार ने की 256 शहरों में हॉलमार्किंग अनिवार्य

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नई दिल्ली, अब घर में रखे पुश्तैनी गहनों की शुद्धता की जांच के बहाने घर पर रखे पुश्तैनी गहनों को भी बाहर लाने की जुगत में है सरकार के अनुसार उन्हें  शुद्धता के आधार पर हॉलमार्क सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट ज्वैलर्स, बैंकर्स और गोल्ड लोन कंपनियों को माननी ही होगी।

इस संबंध में भारतीय मानक ब्यूरो के हॉलमार्किंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक इंदरजीत सिंह ने निर्देश जारी किए हैं। देश के 256 शहरों में हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के बाद बीआईएस का यह फैसला कई मायनों में काफी अहम माना जा रहा है।

अभी तक ज्वैलर्स से खरीदे गए सोने की जांच ग्राहक करा सकते थे। इससे ज्वैलर्स के दावों की सच्चाई परखी जा सकती है। लेकिन अब घर में रखे पुराने सोने की हॉलमार्किग कोई भी करा सकता है। इस तरह के सोने की जांच हॉलमार्किंग सेंटर करेंगे और स्रोत के बारे में नहीं पूछा जाएगा। पुराने सोने की हॉलमार्किंग फीस न्यूनतम 236 रुपये तय की गई है। इस कीमत में एक पीस से लेकर अधिकतम छह पीस गहनों की हॉलमार्किंग कराई जा सकेगी।

 

अभी पुराने सोने को बेचने पर मिलने वाली कीमत सराफा व्यापारी पर निर्भर करती है। सोने की शुद्धता की जांच सराफा व्यापारी खुद करते हैं और उस आधार पर कीमत लगाते हैं। अब पुराना सोना बेचने पर सराफा व्यापारी ग्राहक को बेवकूफ नहीं बना पाएंगे क्योंकि उनके पास उस सोने की शुद्धता का सर्टिफिकेट और हॉलमार्क होगा। यानी उन्हें अपने गहने की सही कीमत मिलेगी।

बीआईएस शुद्धता सर्टिफिकेट को बैंक और गोल्ड लोन कंपनियां भी मान्यता देंगी। अभी सोना गिरवी रखते समय उसकी शुद्धता तय करना उनके हाथों में होता था। साथ ही सोने की पुश्तैनी ज्वैलरी को गलाकर उसकी परख की जाती थी। अब बिना गलाए ही उनकी ज्वैलरी पर लोन मिल जाएगा, जिसे बाद में वापस लेने के रास्ते खुले रहेंगे।

 

इस नियम की आड़ में एक तीर से कई निशाने साधे गए हैं। हॉलमार्किंग के बहाने पुराना सोना लॉकरों से बाहर आएगा। हॉलमार्किंग के बाद निगरानी के दायरे में आ जाएगा और घोषित अचल संपत्ति माना जाएगा। इस तरह अघोषित सोने को बाहर लाने में ये मुहर बहुत काम आएगी।

 

ग्राहक को पुराने सोने पर शुद्धता का सर्टिफिकेट लेने के लिए अपना नाम, पता, फोन नंबर, ज्वैलरी का विवरण, उसकी फोटो देना होगी। साथ ही वजन व गहनों की संख्या बतानी होगी।

भारतीय मानक ब्यूरो के वैज्ञानिक इंदरजीत सिंह कहते हैं, ‘हॉलमार्किंग सेंटर उपभोक्ता से सोने के गहने या कलाकृतियों की जांच कर सकेंगे और सत्यापन के बाद परख रिपोर्ट जारी करेंगे। ये भी फैसला लिया गया है कि कोई भी उपभोक्ता अपने पास रखे पुराने सोने का सर्टिफिकेशन करा सकता है। इस रिपोर्ट को सभी ज्वैलर्स को स्वीकार करना होगा।’

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा कहते हैं कि भारतीय मानक ब्यूरो का नया आदेश लोगों के लिए फायदेमंद है। अभी तक यह आदेश ज्वैलर्स के लिए अनिवार्य था। अब उपभोक्ता न केवल ज्वैलर्स से खरीदे गए सोने की शुद्धता की परख करा सकता है बल्कि अपने पास रखे पुराने सोने पर भी शुद्धता की मुहर लगवा सकता है।
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