पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा : क्या सरकार ने कानून के तहत स्वीकार्य के अलावा किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया है

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नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट इजराइली स्पायवेयर पेगासस के जरिए कुछ खास लोगों की हुई कथित जासूसी संबंधी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करेगा. इससे पहले सीजेआई एनवी रमणा की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया था।

चीफ जस्टिस (CJI) एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने 17 अगस्त को इन याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया था, साथ ही यह स्पष्ट किया था कि अदालत नहीं चाहती कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने वाली किसी भी चीज का खुलासा करे. बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं. पिछले मंगलवार को जैसे ही मामला बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कुछ कठिनाइयों के कारण बेंच द्वारा मांगा गया हलफनामा दाखिल नहीं किया जा सका. उन्होंने कोर्ट से गुरुवार या अगले सोमवार को मामला सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

तुषार मेहता ने कहा, ‘हलफनामे में कुछ कठिनाई है. हमने एक हलफनामा दाखिल किया है, लेकिन आपने (कोर्ट ने) पूछा था कि क्या हम एक और हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं, कुछ अधिकारी नहीं थे. क्या यह मामला गुरुवार या अगले सोमवार को रखा जा सकता है।

सीनियर जर्नलिस्ट एन राम की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें अनुरोध पर कोई आपत्ति नहीं है. पीठ ने कहा, ‘इसे सोमवार को सूचीबद्ध किया जाए.’ कोर्ट इस मामले की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाली एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की एक याचिका सहित 12 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

ये याचिकाएं इजरायली कंपनी NSO के स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग कर प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और पत्रकारों पर सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर जासूसी करने की रिपोर्ट से संबंधित हैं. एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने कहा है कि पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग कर 300 से अधिक भारतीय मोबाइल फोन नंबरों को निगरानी के लिए संभावित लक्ष्यों की सूची में रखा गया था।

केंद्र ने इससे पूर्व मामले में संक्षिप्त हलफनामा दायर किया था. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों पर बहस नहीं होनी चाहिए. SG ने कहा कि याचिकाओं में जांच कि मांग की गई है. यह मुद्दा अहम है और सरकार ने एक समिति गठित की है.

इस पर CJI ने कहा कि आपने पिछली सुनवाई में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा था और अब आप दूसरी बात कर रहे हैं. CJI की इस टिप्पणी पर SG ने कहा कि केंद्र सरकार का स्टैंड यह है कि किसी विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं, यह एक हलफनामे या अदालत या सार्वजनिक रूप में बहस का विषय नहीं हो सकता, क्योंकि इस मुद्दे के अपने नुकसान हैं. सुनवाई के दौरान जज जस्टिस सूर्यकांत ने कहा ‘पिछली बार हमने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी की दिलचस्पी नहीं है. हम आपसे केवल यही सीमित हलफनामा दाखिल करने की उम्मीद कर रहे थे. हमारे सामने ऐसे नागरिक हैं जो अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे है।’

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल पर हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती है. हम इसे व्यापक जनहित और राष्ट्र की सुरक्षा में एक हलफनामे में नहीं रखना चाहेंगे. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ये सभी मुद्दे अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले नागरिकों के वर्ग तक सीमित हो सकते हैं।

CJI ने कहा कि हम फिर दोहरा रहे हैं कि सुरक्षा या रक्षा से जुड़े मामलों को जानने में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है. हम केवल चिंतित हैं, जैसा कि मेरे साथी ने कहा, हमारे सामने पत्रकार, कार्यकर्ता आदि हैं.. यह जानने के लिए कि क्या सरकार ने कानून के तहत स्वीकार्य के अलावा किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों के नागरिक अधिकार का उल्लंघन किया गया या नहीं. मसला तो सीमित है. हम यह मानते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा इसका अलग भाग है. सीजेआई ने कहा कि हमारी चिंता सरकार पर लगे आरोप को लेकर है।

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