प्रधानमंत्री मोदी ने प्रयागराज का दौरा कर महिलाओं को दी ढेर सारी चुनावी सौगात

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प्रयागराज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को प्रयागराज का चुनावी दौरा किया और ढेर सारी सौगात दी। पीएम ने विभिन्न एसएचजी के बैंक खातों में 1000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, साथ ही मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के 1 लाख से अधिक लाभार्थियों को धन हस्तांतरित किया, जो बालिकाओं को सहायता प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री ने 202 पूरक पोषण निर्माण इकाइयों की आधारशिला भी रखी। 1000 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित किया। लगभग 16 लाख महिला सदस्यों को लाभ पहुंचेगा। यह हस्तांतरण दीनदयाल उपाध्याय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई) के तहत किया जाएगा ,जिसमें 80,000 एसएचजी को प्रति एसएचजी 1.10 लाख रुपये का सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) प्राप्त होगा और 60,000 एसएचजी को प्रति एसएचजी 15,000 रुपये की चक्रीय (रिवॉल्विंग) निधि प्राप्त होगी।

मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष फरवरी में हम कुंभ में प्रयागराज की पवित्र भूमि पर आए थे, तब संगम में डूबकी लगाकर अलौकिक आनंद का अनुभव प्राप्त किया। तीर्थ राज प्रयाग की ऐसी पावन भूमि को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं। हजारों सालों से हमारी मातृशक्ति की प्रतीक माँ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की धरती रही है। आज ये तीर्थ नगरी नारी-शक्ति के इतने अद्भुत संगम की भी साक्षी बन रही है।

उत्तर प्रदेश में विकास के लिए, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो काम हुआ है, वो पूरा देश देख रहा है। अभी मुझे यहां मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की 1 लाख से ज्यादा लाभार्थी बेटियों के खातों में करोड़ो रूपये ट्रांसफर करने का सौभाग्य मिला।

यूपी सरकार ने बैंक सखियों के ऊपर 75 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन की जिम्मेदारी सौंपी हैं। 75 हजार करोड़ रुपये का कारोबार गांवों में रहने वाली मेरी बहनें-बेटियां कर रही हैं। उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है- अब वो पहले की सरकारों वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी। डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है।

बेटियां कोख में ही ना मारी जाएं, वो जन्म लें, इसके लिए हमने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से समाज की चेतना को जगाने का प्रयास किया। आज परिणाम ये है कि देश के अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है।

प्रसव के बाद भी बिना चिंता के अपने बच्चे की शुरुआती देखरेख करते हुए मां अपना काम जारी रख सके। इसके लिए महिलाओं की छुट्टी को 6 महीने किया गया है। आज हमारी सरकार की योजनाएं, इस असमानता को भी दूर कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो घर दिये जा रहे हैं, वो प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं के ही नाम से बन रहे हैं।

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