उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और दीदारगंज से बसपा विधायक सुखदेव राजभर का निधन

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और दीदारगंज से बसपा विधायक सुखदेव राजभर का सोमवार रात 8:30 बजे निधन हो गया. उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

यहीं पर इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली. सुखदेव राजभर मायावती के साथ ही मुलायम और कल्याण सिंह की सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे. इस वरिष्ठ नेता के निधन पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दुख जताया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया, ”उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष एवं माननीय विधायक श्री सुखदेव राजभर जी का निधन अत्यंत दुःखद है. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!”

अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, ”अत्यंत दु:खद! यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राजनेता श्री सुखदेव राजभर जी का निधन अपूरणीय क्षति. शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना, दिवंगत आत्मा को शांति दे भगवान! ‘सामाजिक न्याय’ को समर्पित आप का राजनीतिक जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा. विनम्र श्रद्धांजलि.”

सुखदेव राजभर लालगंज क्षेत्र से चार बार विधायक रहे. उन्होंने अपना पहला चुनाव साल 1991 के विधान सभा चुनाव में भाजपा के नरेन्द्र सिंह को 24 मतों से पराजित कर जीता और विधायक बने थे. 1993 में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में मंत्री बने. 1996 के चुनाव में भाजपा के नरेन्द्र सिंह से पराजित हुए. पराजित होने के बाद विधान परिषद सदस्य चुन लिए गए. 2002 और 2007 के चुनाव में फिर से जीते. लालगंज विधान सभा सुरक्षित हो जाने पर 2012 में दीदारगंज विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सपा के आदिल शेख से चुनाव हार गए. 2017 में पुनः दीदारगंज से चुनाव लड़े और जीत गए.

सुखदेव राजभर मायावती, कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव की कैबिनेट में मंत्री रहे. उत्तर प्रदेश की 11वीं, 12वीं, 14वीं, 15वीं और 17वीं विधान सभा में विधायक रहे सुखदेव राजभर का जन्म 5 सितम्बर 1951 को आजमगढ़ के बडगहन में हुआ था. बीएससी व एलएलबी की शिक्षा प्राप्त सुखदेव राजभर ने अपने जीवन में वकालत भी की. वह अपने पीछे एक पुत्र व पांच पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वह अनुसूचित जातियों, जन जातियों और विमुक्त जातियां सम्बंधी समिति के सदस्य भी रहे.

अप्रैल-मई 1993 में बारहवीं विधान सभा के मध्यावधि चुनाव में दूसरी बार विधायक बने और 1993 से 1995 तक मुलायम सिंह यादव व मायावती के मंत्रिमण्डल में सहकारिता, माध्यमिक, बेसिक शिक्षा व प्रौढ़ शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री रहे. जनवरी 1997 में विधान परिषद के सदस्य चुने गये और तत्कालीन कल्याण सिंह मंत्रिमण्डल में मंत्री रहे. फरवरी 2002 तक वह एमएलसी रहे. फरवरी 2002 में चौदहवीं विधान सभा के चुनाव में तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए.

मई 2002 से अगस्त 2003 तक संसदीय कार्य मंत्री रहे, इसके तत्कालीन मायावती मंत्रिमण्डल में वस्त्र उद्योग व रेशम विभाग के मंत्री रहे. 2002 से 2003 के बीच विधान सभा की नियम समिति के सदस्य रहे. 2002 से 2004 के बीच कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य रहे. 2005 से 2012 के बीच पन्द्रहवीं विधान सभा के चौथी बार सदस्य चुने गये. 2007 से 2012 के बीच प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर व हांगकांग की विदेश यात्राएं भी कीं.

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