तमिलनाडु कृषि कानूनों का विरोध करने वाला बना सातवां राज्य, कृषि कानूनों के विरोध में प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

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चेन्नई, केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में तमिलनाडु सरकार ने शनिवार को विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनिमत के साथ पारित भी कर दिया गया।

आपको बता दें कि पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, केरल और पश्चिम बंगाल के बाद तमिलनाडु कृषि कानूनों का विरोध करने वाला सातवां राज्य बन गया है।

शनिवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ये प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया, लेकिन बीजेपी और AIADMK ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। इस प्रस्ताव के विरोध में बीजेपी और अन्नाद्रमुक के विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट किया। अन्नाद्रमुक विधायकों का कहना है कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में ये प्रस्ताव जल्दबाजी में लाया गया है। विधायकों ने कहा कि राज्य सरकार को इस प्रस्ताव को लाने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी और किसानों की भी राय लेना चाहिए थी।

 

वहीं कृषि कानूनों के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि पिछले एक साल के दौरान कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले किसानों पर जितने भी मामले दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा केंद्र सरकार इन कृषि कानूनों को जल्द से जल्द वापस भी ले।

आपको बता दें कि एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके शुरुआत से ही कृषि कानूनों के विरोध में रही है। एमके स्टालिन पहले भी कह चुके हैं कि ये कानूनों किसानों के हित में नहीं हैं, इसीलिए राज्य सरकार ने इन कानूनों को वापस लेने की मांग को करते हुए इनके विरोध में प्रस्ताव को लाने का फैसला किया था। एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव को लाने का संकेत 2 महीने पहले मई में ही दे दिया था, जब उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु सरकार इन कानूनों की वापसी के लिए राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव लेकर आएगी।

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