शहीद उधम सिंह की शहादत दिवस पर अग्निपथ के विरोध में देशभर में चक्का जाम करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद में रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukt Kisan Morcha) से जुड़े सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय बैठक में हिस्सा लिया और किसान आंदोलन को लेकर तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए.

संयुक्त किसान मोर्चा ने का कि 9 दिसंबर 2021 को मोर्चा उठाने पर सरकार ने किसानों से जो वादे किए थे, केंद्र सरकार ने पूरे नहीं किए. किसान संगठनों का आरोप है कि केन्द्र सरकार अपने वायदे से पूरी तरह मुकर गई है. ना तो MSP पर कमेटी का गठन हुआ है और ना ही आंदोलन के दौरान किसानों पर लगाए गए मुकदमें वापस लिए गए हैं. इतना ही नहीं सरकार बिजली बिल को संसद में लाने की कोशिश कर रही है और सरकार किसानों की सबसे बड़ी मांग, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, पर सरकार विचार करने को भी तैयार नहीं है.

वादाखिलाफी विरोधी सभा चलाएगा SKM

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि केन्द्र सरकार की इस वादाखिलाफी के विरोध में 18 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से 31 जुलाई शहीद उधम सिंह की शहादत दिवस तक देशभर में जिला स्तर पर ‘वादाखिलाफी विरोधी सभा’ आयोजित की जाएगी. इस अभियान के अंत में 31 जुलाई को सरदार उधम सिंह के शहादत दिवस पर सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक देशभर में मुख्य मार्ग पर चक्का जाम किया जाएगा. इस आयोजन से आम जनता को परेशानी ना हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाएगा.

रविवार को हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि अग्निपथ योजना के विरुद्ध किसान संगठन, बेरोजगार युवाओं और पूर्व सैनिकों को लामबंद करेगा. SKM ने अग्निपथ योजना को राष्ट्र-विरोधी, युवा-विरोधी और किसान-विरोधी क़रार दिया है. अग्निपथ योजना के चरित्र का पर्दाफ़ाश करने के लिए 7 अगस्त से 14 अगस्त के बीच देशभर में जय-जवान जय-किसान सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पूर्व सैनिकों और बेरोजगार युवाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा.

बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं ने कहा कि लखीमपुर खीरी हत्याकांड के 10 महीने बाद भी अजय मिश्र टेनी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहना देश की कानून व्यवस्था के साथ एक भद्दा मजाक है. संयुक्त किसान मोर्चा शुरू से किसानों को न्याय दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है और पीड़ित परिवारों को कानूनी और अन्य हर तरह की सहायता देता रहा है. इसी मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा लखीमपुर खीरी में 18-19-20 अगस्त को 75 घंटे का पक्का मोर्चा आयोजित करेगा, जिसमें देश भर से किसान नेता और कार्यकर्ता भाग लेंगे.

मोहम्मद ज़ुबैर और सीतलवाड़ समेत कई लोगों की गिरफ्तारी पर जताया विरोध

SKM के नेताओं ने बैठक में किसान, मानवाधिकार और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाते हुए कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में किसान नेता आशीष मित्तल, बंगाल के फरक्का में अदानी के हाई-वोल्टेज तार का विरोध कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज, छत्तीसगढ़ में विरोध कर रहे किसानों, साथ ही तीस्ता सीतलवाड़, आरबी श्रीकुमार और मुहम्मद ज़ुबैर जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी, पूरे देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते दमन का संकेत देती है। संयुक्त किसान मोर्चा इस लोकतांत्रिक संघर्ष में इन सभी कार्यकर्ताओं और संगठनों के साथ खड़ा है.

SKM का दावा- पंजाब चुनाव के दौरान अलग हुए 16 संगठन दोबारा जुड़े

संयुक्त किसान मोर्चे का दावा है कि रविवार की सभा में देश के 15 राज्यों से लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. पंजाब चुनाव के मुद्दे पर संयुक्त किसान मोर्चा से अलग किए गए 16 संगठनों को मोर्चे में से दोबारा जोड़ा गया और बैठक में चंद्रशेखर कोडीहल्ली के नेतृत्व वाली कर्नाटक राज्य रैय्यत संघ को संयुक्त किसान मोर्चा से निष्कासित करने का भी निर्णय लिया गया. संयुक्त किसान मोर्चा ने विश्वास व्यक्त किया है कि उसके दरवाजे देश के तमाम संघर्षरत किसानों और किसान संगठनों के लिए खुले हैं, और यह उम्मीद व्यक्त की कि सरकार के विरुद्ध किसानों का संघर्ष और तेज तथा प्रभावी बनेगा.

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